रणजी खेलने के लायक नहीं? फिर भी गौतम गंभीर की ज़िद पर टीम में, कौन है ये खिलाड़ी?

Abhishek Sharma, Gautam Gambhir

भारतीय क्रिकेट में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, लेकिन जब किसी खिलाड़ी पर टीम मैनेजमेंट और कोच हद से ज़्यादा भरोसा दिखाते हैं, तो सवाल उठना लाज़मी है। टी20 विश्व कप 2026 में कुछ ऐसा ही देखने को मिल रहा है, जहाँ एक खिलाड़ी के खराब प्रदर्शन के बावजूद कोच गौतम गंभीर उसे लगातार प्लेइंग इलेवन में मौका दे रहे हैं। इस खिलाड़ी की आलोचना इस हद तक हो रही है कि विशेषज्ञ और प्रशंसक उसे “रणजी ट्रॉफी खेलने के लायक भी नहीं” बता रहे हैं। इसके बावजूद गंभीर की ज़िद के आगे चयनकर्ता भी बेबस नज़र आ रहे हैं। आखिर कौन है यह खिलाड़ी और क्या है इस पूरे विवाद की कहानी?

अभिषेक शर्मा: अर्श से फर्श पर, विश्व कप में बना अनचाहा रिकॉर्ड

यह खिलाड़ी कोई और नहीं, बल्कि विस्फोटक युवा सलामी बल्लेबाज़ अभिषेक शर्मा हैं। टी20 विश्व कप 2026 का अभियान उनके लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं रहा है। दुनिया के नंबर एक टी20 बल्लेबाज़ के रूप में टूर्नामेंट में प्रवेश करने वाले अभिषेक ग्रुप स्टेज में अपना खाता तक नहीं खोल पाए। उन्होंने अमेरिका, पाकिस्तान और नीदरलैंड्स के खिलाफ लगातार तीन मैचों में शून्य पर आउट होकर एक शर्मनाक रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया।

  1. बनाम यूएसए: 1 गेंद पर 0 रन
  2. बनाम पाकिस्तान: 4 गेंदों पर 0 रन
  3. बनाम नीदरलैंड्स: 3 गेंदों पर 0 रन

इस अनचाहे रिकॉर्ड ने उन्हें टी20 विश्व कप के 19 साल के इतिहास में लगातार तीन बार डक पर आउट होने वाला पहला भारतीय बल्लेबाज़ बना दिया है। अपनी निडर बल्लेबाज़ी और ताबड़तोड़ शुरुआत देने की क्षमता के लिए पहचाने जाने वाले अभिषेक का इस तरह दबाव में बिखर जाना उनके आत्मविश्वास और तकनीक पर गंभीर सवाल खड़े करता है। प्रशंसकों का गुस्सा सोशल मीडिया पर साफ दिख रहा है, जहाँ उन्हें टीम से बाहर करने की मांग ज़ोर पकड़ रही है।

गौतम गंभीर का अटूट विश्वास: प्रतिभा पर दांव या ज़िद?

एक तरफ जहाँ अभिषेक शर्मा के प्रदर्शन की चौतरफा आलोचना हो रही है, वहीं दूसरी ओर भारतीय टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर उन पर अपना अटूट विश्वास बनाए हुए हैं। गंभीर की कोचिंग शैली खिलाड़ियों को लंबा मौका देने के लिए जानी जाती है, लेकिन अभिषेक के मामले में उनका यह भरोसा कई लोगों को ‘ज़िद’ लग रहा है। फैंस और कई क्रिकेट पंडितों का मानना है कि विश्व कप जैसे महत्वपूर्ण टूर्नामेंट में फॉर्म को प्रतिभा से ज़्यादा तरजीह दी जानी चाहिए।

टीम मैनेजमेंट का मानना है कि अभिषेक एक ‘हाई-इम्पैक्ट’ खिलाड़ी हैं, जो कुछ ही ओवरों में मैच का रुख पलट सकते हैं। उनकी क्षमता को देखते हुए उन्हें एक या दो खराब पारियों के आधार पर बाहर नहीं किया जा सकता। गंभीर का यही तर्क है कि एक प्रतिभाशाली खिलाड़ी को आत्मविश्वास हासिल करने के लिए पर्याप्त मौके मिलने चाहिए। हालाँकि, यह दांव अब उल्टा पड़ता दिख रहा है और टीम पर शुरुआती विकेट खोने का दबाव बढ़ रहा है।

प्रदर्शन में निरंतरता की भारी कमी

अभिषेक के हालिया प्रदर्शन पर नज़र डालें तो निरंतरता की कमी साफ दिखाई देती है। जनवरी और फरवरी 2026 के बीच खेली गई उनकी पिछली 10 अंतर्राष्ट्रीय टी20 पारियों का पैटर्न यही कहानी बयां करता है। एक तरफ उन्होंने न्यूज़ीलैंड के खिलाफ द्विपक्षीय सीरीज़ में सिर्फ 20 गेंदों पर नाबाद 68 रनों की तूफानी पारी खेली थी, तो वहीं दूसरी तरफ उन्होंने कई बार सिंगल-डिजिट स्कोर भी बनाए।

2026 में खेले गए मैचों में वह पांच बार शून्य पर आउट हुए हैं, जो किसी भी शीर्ष क्रम के बल्लेबाज़ के लिए चिंताजनक आंकड़ा है। दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ अभ्यास मैच में 18 गेंदों पर 24 रन और एक अन्य मैच में 16 गेंदों पर 30 रन जैसी छोटी मगर तेज़ पारियां उनकी क्षमता की झलक तो दिखाती हैं, लेकिन बड़ी प्रतियोगिताओं में लगातार असफल होना उनके चयन पर सवाल खड़े करता है। शानदार प्रदर्शन और बुरी तरह फ्लॉप होने के बीच का यह बड़ा अंतर प्रशंसकों को भी दो गुटों में बांट चुका है। एक वर्ग उन्हें और मौके देने की वकालत कर रहा है, जबकि दूसरा वर्ग किसी इन-फॉर्म खिलाड़ी को टीम में शामिल करने की मांग कर रहा है।

विशेषज्ञों और प्रशंसकों के बीच छिड़ी बहस

गौतम गंभीर के इस फैसले ने क्रिकेट जगत में एक बड़ी बहस छेड़ दी है। क्या एक कोच को अपनी पसंद के खिलाड़ी को इतने मौके देने चाहिए, जबकि बेंच पर यशस्वी जायसवाल और संजू सैमसन जैसे प्रतिभाशाली खिलाड़ी बैठे हों? कई पूर्व क्रिकेटरों का मानना है कि गंभीर का यह कदम टीम के संतुलन को बिगाड़ रहा है और अन्य खिलाड़ियों के साथ नाइंसाफी है।

आलोचकों का तर्क है कि अभिषेक का फुटवर्क दबाव में काम नहीं कर रहा है और वह बार-बार एक ही तरह की गलती करके आउट हो रहे हैं। उनका मानना है कि ऐसे खिलाड़ी को घरेलू क्रिकेट, जैसे रणजी ट्रॉफी, में वापस जाकर अपनी तकनीक पर काम करना चाहिए। वहीं, गंभीर के समर्थक मानते हैं कि युवा खिलाड़ी को समर्थन की ज़रूरत होती है और उन पर भरोसा जताना कोच का काम है।

आगे क्या होगा? क्या गंभीर बदलेंगे अपना फैसला?

टी20 विश्व कप अब अपने महत्वपूर्ण पड़ाव पर है, जहाँ एक भी गलती टीम को टूर्नामेंट से बाहर कर सकती है। ऐसे में सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या गौतम गंभीर अपनी ज़िद पर अड़े रहेंगे या टीम के हित में कोई कड़ा फैसला लेंगे। सुपर-8 के मुकाबलों में टीम इंडिया को और मज़बूत टीमों का सामना करना है, जहाँ एक कमज़ोर शुरुआत भारी पड़ सकती है।

क्या अभिषेक शर्मा अगले मैच में एक धमाकेदार वापसी करके अपने आलोचकों का मुंह बंद कर पाएंगे? या फिर टीम मैनेजमेंट को अपनी रणनीति बदलने पर मजबूर होना पड़ेगा? यह देखना दिलचस्प होगा कि गंभीर का यह ‘मास्टरस्ट्रोक’ या ‘ज़िद’ टीम इंडिया को विश्व कप में कहाँ तक ले जाती है। फिलहाल, अभिषेक शर्मा का बल्ला खामोश है और गौतम गंभीर का विश्वास अडिग है, लेकिन क्रिकेट अनिश्चितताओं का खेल है, जहाँ पासा कभी भी पलट सकता है।

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